डाक्टर साहब की मर्जी है क्या करें?

सोलन। एक चिकित्सक ओपीडी में बैठे, इमरजेंसी देखें या फिर राउंड पर जाए! यह हर रोज की परेशानी है। जिला अस्पताल प्रबंधन इसमें क्या कर सकता है? रोजाना 1400 के करीब ओपीडी है। काम का बोझ अधिक है…. यह कहकर अस्पताल के अधिकारी अपने प्रबंधन को बेहतर बताते हैं।
वहीं उन मरीजों का क्या जो सुबह पांच बजे घर से भूखे प्यासे निकलकर ओपीडी की कतारों में खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। डाक्टर के कमरे में दाखिल होते ही यह चिंता सताने लग जाती है कि डाक्टर चला गया तो बारी आनी मुश्किल है।

बारह बजे तक आंखों देखा हाल
दिन शुक्रवार दोपहर के 12 बजने को हैं। ओपीडी नंबर 134 गायनी। ओपीडी नंबर 128 चाइल्ड और 129 त्वचा रोग की ओपीडी। तीनों में चिकित्सक नहीं हैं। 12 बजने के चंद मिनट बाद चाइल्ड ओपीडी में चिकित्सक बैठ जाता है। बाहर मरीजों की कतारें लगी हैं। पूछने पर लोग कहते हैं कि डाक्टर साहब कभी आ रहे हैं, कभी जा रहे हैं, भूख प्यासे दम निकलने लगा है। कुछ लोग तो सुबह पांच बजे अल्ट्रासाउंड व अन्य के लिए घर से निकले हैं। क्या करें डाक्टर साहब की मर्जी है। लोगों की परेशानी का आखिर क्या? शामती से अश्विन, कसौली से कृष्ण मुरारी गीता देवी और कंडाघाट की गीता देवी ने व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की।
केस वन
बडू साहेब के ललित चौहान अपने पांच वर्षीय बेटे को दिखाने आए हैं। सुबह पांच बजे घर से चले थे। करीब दस बजे वे कतार में लग गए। डाक्टर न होने की चिंता उन्हें सता रही है। उन्होंने कहा कि लाइन में खड़े-खड़े वे परेशान हो चुके हैं।
केस टू
राजगढ़ से कमला देवी अपने पति के साथ गायनी के बाहर खड़ी हैं। डाक्टर ओपीडी में नहीं हैं। उन्होंने बताया कि सुबह ही वह लाइन में लग गई थी। चिकित्सक अपनी मर्जी से बैठते हैं, कोई आ रहा है तो कोई जा रहा है। ऐसे में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
केस थ्री
कायलर के राजेश कुमार अपने 10 वर्षीय राहुल को दिखाने पहुंचे हैं। चिकित्सक चाइल्ड ओपीडी में नहीं हैं। व्यवस्था को लेकर उनमें भारी रोष है। उनके अनुसार ओपीडी के समय चिकित्सकों को बाहर नहीं जाना चाहिए। अन्य के लिए विकल्प होना चाहिए।

जिम्मेवारी एमएस की : सीएमओ
इस संबंध में सीएमओ डा शशी पाल के अनुसार ओपीडी में व्यवस्था देखने की जिम्मेवारी एमएस की है। फील्ड का काम मेरे जिम्मे है और अस्पताल का प्रबंधन संभालना एमएस का काम। यदि प्रबंधन में कोताही है तो इस पर संज्ञान लिया जाएगा। मौजूदा समय में डाक्टरों की कमी कोई नहीं। सिर्फ गायनी का जिम्मा एक डाक्टर के कंधे पर है। शेष विभागों में डाक्टर काफी हैं।

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